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महान् शिक्षाविद् प्रोफेसर अच्युत सामंत को 68वीं मानद डॉक्टरेट की डिग्री मिली ताइवान के चाओयांग विश्वविद्यालय से

महान् शिक्षाविद् प्रोफेसर अच्युत सामंत को 68वीं मानद डॉक्टरेट की डिग्री मिली ताइवान के चाओयांग विश्वविद्यालय से

भुवनेश्वर, 7.6: महान् शिक्षाविद्, सामाजिक कार्यकर्ता और कीट- कीस के संस्थापक प्रोफेसर अच्युत सामंत को ताइवान के चाओयांग प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय
देवी सुभद्रा कौन हैं?

देवी सुभद्रा कौन हैं?

-अशोक पाण्डेय ——————- “नारद की बात मानकर जगन्नाथ जी पूर्ण दारु ब्रह्म रूप में अवतार ले लिए, बलभद्र जी और
लक्ष्मीसागर में स्वस्तिक सैनिटेशन के नए भव्य शोरूम का उद्घाटन

लक्ष्मीसागर में स्वस्तिक सैनिटेशन के नए भव्य शोरूम का उद्घाटन

– ओडिशा में पहला ‘जैगुआर डायरेक्टर्स क्लब शोरूम’ बना भुवनेश्वर। ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर के लक्ष्मीसागर में स्वस्तिक सैनिटेशन के
आज निर्जला एकादशी है।

आज निर्जला एकादशी है।

आज निर्जला एकादशी है। गायत्री जयंती है। श्रीकृष्ण (जगन्नाथ) रूक्मिणी विवाह है। ऐसे पावन अवसर पर यह जानकारी देना परम
भगवान जगन्नाथ की कथा सुनाने वाले चार हैं और श्रोता भी चार हैं।-स्कन्द पुराण

भगवान जगन्नाथ की कथा सुनाने वाले चार हैं और श्रोता भी चार हैं।-स्कन्द पुराण

—————— तीर्थ, क्षेत्र और धाम की त्रिवेणी है पुरुषोत्तम नगरी पुरी । यहीं पर विराजमान हैं भगवान जगन्नाथ अपने चतुर्धा
जानिए चतुर्धा देवविग्रहों के रंगों के विषय में

जानिए चतुर्धा देवविग्रहों के रंगों के विषय में

-अशोक पाण्डेय -अशोक पाण्डेय भगवान जगन्नाथ जी अपने चतुर्धा देवविग्रह रुप में प्रकृति के साथ मानव संबंध को बताते हैं
जन्मदिन विशेष आलेखः

जन्मदिन विशेष आलेखः

प्रथम मारवाड़ी सोसायटी,भुवनेश्वर लाइफटाइम एचिवमेंट अवार्ड से सम्मानित शिबुभाई को हैप्पी बर्थडे। 06जून,1965 को जन्मे मारवाड़ी सोसायटी भुवनेश्वर के उपाध्यक्ष
“श्रीपुरोषोत्तम क्षेत्र जगन्नाथ पुरी धाम पर  भगवान जगत के नाथ की असीम कृपा “

“श्रीपुरोषोत्तम क्षेत्र जगन्नाथ पुरी धाम पर भगवान जगत के नाथ की असीम कृपा “

-अशोक पाण्डेय —————— जैसा कि हमारे पुराण , विशेषकर स्कन्द पुराण यह स्पष्ट करता है कि भगवान जगन्नाथ के पूर्ण
“1986 में जब भगवान जगन्नाथ ने  ‘चण्डालिका’नामक अपनी भक्तिन के लिए  रथयात्रा रोक दी थी।”

“1986 में जब भगवान जगन्नाथ ने ‘चण्डालिका’नामक अपनी भक्तिन के लिए रथयात्रा रोक दी थी।”

-अशोक पाण्डेय —————- यह दिव्य घटना 1986 की है। रथयात्रा की सारी रीति -नीति संपन्न हो चुकी थी। भगवान जगन्नाथ
भगवान जगन्नाथ हमें प्रतिदिन

भगवान जगन्नाथ हमें प्रतिदिन

भगवान जगन्नाथ हमें प्रतिदिन प्रातः काल उनके नाम का स्मरण करने,उनके दर्शन करने,उनका वंदन करने तथा उनके दीनबंधु नाम की

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