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“अगर हम न कुछ करेंगे न‌ दूसरों को कुछ भला करने देंगे। सिर्फ अच्छे काम करने वाले की टांग खींचने की संस्कृति को विकसित करेंगे तो किसी का भला नहीं होगा।”

-अशोक पाण्डेय ———————- आज के एक मात्र सामाजिक प्राणी मनुष्य की मनोवृत्ति एक संस्कार और एक नई संस्कृति के रूप

मेरा अनुभव ओड़िशा के विषय में

-अशोक पाण्डेय 1981 अगस्त से अप्रत्यक्ष रूप से और 1986 अगस्त से प्रत्यक्ष रूप से मैं ओड़िशा से जुड़ा हूं।
मामस भुवनेश्वर शाखा ने आयोजित किया गणगौड़ उत्सव

मामस भुवनेश्वर शाखा ने आयोजित किया गणगौड़ उत्सव

भुवनेश्वरःपहली अप्रैलःअशोक पाण्डेयः मारवाड़ी महिला समिति भुवनेश्वर शाखा की अध्यक्षा जूही अग्रवाल के नेतृत्व में राजस्थानी नव विवाहिताओं का सबसे

“भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में‌ सबसे अधिक सहायक सिद्ध होंगे -अच्छे शिक्षालय,अच्छे शिक्षक और अच्छे विद्यार्थी।”

-व्यक्तिगत सोच: अशोक पाण्डेय की। ——————— त्रेतायुग से यह यथार्थ और अनुकरणीय आदर्श व्यवस्था भारत में रही है और भारत

“अपनी कुलदेवी की पूजा का प्रचलन राजस्थान से ही आरंभ हुआ।”

-अशोक पाण्डेय ——————— आज राजस्थान दिवस है। राजस्थान वीरों की पावन भूमि है। राजस्थान किसानों की कर्म भूमि है। राजस्थान
हिन्दू नववर्ष, चैत्र नवरात्र और राजस्थान दिवस पर जयसर माता मंगलपाठ भुवनेश्वर में आयोजित

हिन्दू नववर्ष, चैत्र नवरात्र और राजस्थान दिवस पर जयसर माता मंगलपाठ भुवनेश्वर में आयोजित

भुवनेश्वर,30 मार्च, अशोक पाण्डेय: हिन्दू नववर्ष, चैत्र नवरात्र और राजस्थान दिवस के उपलक्ष्य में स्थानीय तेरापंथ भवन में भुवनेश्वर जयसर

“अपने मन पर नियंत्रण रखें! जीवन में सुख- शांति आएगी।”

-अशोक पाण्डेय ——————— हमारा मन बहुत चंचल है। यह एक ही साथ पूरी दुनिया की भी सैर करा सकता है।मन

“गंगा सिर्फ पवित्रतम नदी नहीं है अपितु विकास को सतत बढ़ाने वाली दैवी ऊर्जा शक्ति है।”

-स्वतंत्र विचार: अशोक पाण्डेय का। ———————- “शंकर तेरी जटा से निकली है गंगधारा।”यह सच है कि गंगा भारतवर्ष की पवित्रत
श्रीराम भारत की आत्मा तथा  भारतीय अस्मिता के जीवंत प्रमाण हैं…

श्रीराम भारत की आत्मा तथा भारतीय अस्मिता के जीवंत प्रमाण हैं…

-अशोक पाण्डेय त्रेता युग से ही मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम भारत की आत्मा तथा भारतीय अस्मिता के जीवंत प्रमाण हैं। श्रीरामचन्द्र

“देना और लेना दोनों जरूरी है।”

-अशोक पाण्डेय ———————- ओड़िशा प्रदेश एक ऐसा प्रदेश है जहां पर मंदिरों की संख्या बहुत अधिक है। यहां के अधिकांश

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