अपने आपको सही तरीके से समझें!
-अशोक पाण्डेय
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कहते हैं -“आप हमेशा अपनी पसंद का भोजन करें!
दूसरों की पसंद से वस्त्र धारण करें!
श्रीमद् भागवत महापुराण के अनुसार:”जैसा अन्न वैसा ही मन।”
जगन्नाथ संस्कृति के अनुसार भी:”जगन्नाथ का भात,जगत पसारे हाथ।”
इसलिए आप आत्मविश्वासी बनकर स्वमूल्यांकन करें!
मान्यवर,दूसरों की आलोचना करने से पहले अपने आपको देखें!
कबीरदास जी ने भी अपनी साखी में ‘बुरा जो देखन मैं चला …’में भी स्वमूल्यांकन की ही बात कहते हैं।
जय हो हनुमान जी की!
-अशोक पाण्डेय











