——————
पौराणिक मान्यता के आधार पर संत वह होता है जो अपने इष्टदेव पुरुषोत्तम; जगन्नाथ की रोचक कथा का नित्य श्रवण करता हैं और उनके अनन्य भक्तों की
व्यथा को नित्य बड़े ही करुण व सहानुभूति-भाव
से समझता है और उनकी हरसंभव मदद आत्मीय भाव से करता है।
इसीलिए आपके समुन्नत संत-जीवन की मंगल कामनाओं के साथ -अशोक पाण्डेय
आप में वास्तविक संत के लक्षण की अनुभूति अशोक पाण्डेय करते हैं।











