इस संसार में सबसे दुर्लभ और उत्तम है; मानव -शरीर । इसमें ही आध्यात्मिक शक्तियां अन्तर निहित हैं। मानसिक शक्तियां भी मानव शरीर में ही हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि प्रकृति का पूर्ण सानिध्य मानव शरीर को ही प्राप्त है।मानव शरीर ही मुक्ति का एक मात्र द्वार है। मान्यवर,आप भी पुरुषोत्तम मास में अपने मानव -शरीर को शुद्ध और पवित्र रखें!
जय हो भगवान जगन्नाथ पुरुषोत्तम की!
-अशोक पाण्डेय
इस संसार में सबसे दुर्लभ और उत्तम है; मानव -शरीर ।











