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जय जगन्नाथ!

जय जगन्नाथ!
जगन्नाथ जी राजा इन्द्रद्युम्न से कहते हैं कि वे उनको मानव रूप में दर्शन अवश्य देंगे लेकिन उसके लिए वे एक शर्त रखते हैं कि उनकी अनन्य भक्ति में राजा इन्द्रद्युम्न के किसी भी प्रकार के ऐश्वर्य बल का अहंकार नहीं होना चाहिए और राजा इन्द्रद्युम्न ने भगवान जगन्नाथ की भक्ति अहंकार रहित भाव, श्रद्धा, विश्वास और अटूट भक्ति के साथ की। मान्यवर,आज आषाढ़ शुक्ल त्रयोदशी तिथि है , नीलाद्रिनाथ के नीलाद्रि विजय की। इसीलिए आप भी अहंकार रहित होकर उनकी भक्ति करें!
-अशोक पाण्डेय

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