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‘धाम’ अर्थात् जहां पर भगवान जगन्नाथ निवास करते हैं और उनको जगत के नाथ के रूप में मान्यता प्रदान किया है आदिशंकराचार्य जी ने। जैसे: बदरीनाथ,द्वारका, जगन्नाथ पुरी और रामेश्वरम। भगवान जगन्नाथ बदरीनाथ में जगकर दैनिक कार्यों से निवृत्त होते हैं। द्वारका में श्रृंगार करते हैं, जगन्नाथ पुरी में 56 प्रकार के अन्न का भोग ग्रहण करते हैं और रामेश्वरम धाम में शयन करते हैं। ‘क्षेत्र’ अर्थात् जहां पर जगन्नाथ अपने भक्तों को दर्शन देने के लिए अपने रत्न सिंहासन पर अनादिकाल से विराजमान हैं और तीर्थ वह है जहां पर पवित्र स्नान कर भगवान जगन्नाथ के दर्शन किया जाता है। जैसे : वहां का महोदधि।जगन्नाथ संस्कृति की यह लौकिक मान्यता है कि जगन्नाथ धाम भी है, क्षेत्र भी है और पवित्रतम तीर्थ भी है।
जय जगन्नाथ!
-अशोक पाण्डेय
जानिए: धाम, तीर्थ और क्षेत्र के विषय में।











