
जानिए भगवान जगन्नाथ जी की रथयात्रा के डाहुक के विषय में-
प्रतिवर्ष आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को भगवान जगन्नाथ जी की विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा पुरी धाम में अनुष्ठित होती है। बड़दाण्ड पर दौड़ने वाले क्रमशः तालध्वज रथ,देवदलन रथ और नंदीघोष रथ के रथों पर बैठे डाहुक रथ खींचने वाले सेवायतों और भक्तों के रथ खींचने के उत्साह को बढ़ाने के लिए गीत गाते हैं। भगवान जगन्नाथ के साथ अपने सखा भाव को अपनी कविताओं में प्रदर्शित करते हैं।डाहुक के गीतों में कुछ ऐसी भावनाएं होती रही हैं जिसको आयोजक पुरी श्रीमंदिर प्रशासन को बहुत अच्छा नहीं लगा। इसीलिए 1996 नवकलेवर वर्ष से रोक लगा दिया है। सच तो यह है कि डाहुक अपनी छड़ी से रथों को बड़दाण्ड के बीच खींचने का मात्र इशारा करता है।
पिछले 36 सालों का अनुभव भक्त अशोक पाण्डेय का।










