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दो दिवसीय नादब्रह्म संगीत महोत्सव संपन्न

भुवनेश्वर, 11 जुलाई , अशोक पाण्डेय:
स्थानीय बुद्ध मंदिर,यूनिट-3 के सभागार में नादब्रह्म संस्था के तत्वावधान में 10-11 जुलाई को आयोजित दो दिवसीय नादब्रह्म संगीत महोत्सव संपन्न हो गया।कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन उद्घाटक के रुप में एकाम्र विधायक बाबू सिंह ने 10 जुलाई को किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि नादब्रह्म ने उत्कृष्ट संगीत कार्यक्रमों को जन-जन तक पहुंचाकर एकाम्र क्षेत्र में अपनी विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान बनाई है।मुख्य अतिथि ओड़िशा फिल्म पत्रकार दिलीप हाली ने गीतगोविंद और ओडिशी परंपरा पर आधारित कार्यक्रमों के माध्यम से ओडिशा की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में नादब्रह्म के योगदान की सराहना की।सम्मानित अतिथि सेंट्यूरियन विश्वविद्यालय के वरिष्ठ प्रशासक एवं कुलपति डॉ. अजय नायक ने कहा कि मीनती भंज और प्रोफेसर डॉ. कुआँर जैसे कलाकारों के प्रयासों से नादब्रह्म ओडिशा की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण और प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।संस्था के संयुक्त सचिव प्रदीप कुमार बेहरा तथा अध्यक्ष ब्रह्मानंद राउत ने संस्था की निरंतर प्रगति और सफलता की कामना की।इस अवसर पर गुरु पूर्णचंद्र स्वाईं को ‘नादब्रह्म संगीत सम्मान’ तथा गुरु मुरलीधर स्वाईं को ‘गुरु जगन्नाथ कुआँर तालवाद्य सम्मान’ से विशिष्ट अतिथियों द्वारा सम्मानित किया गया।आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम के पहले दिन डॉ. जयस्मिता कुआँर द्वारा गीतगोविंद की प्रस्तुति दी गई।गुरु पूर्णचंद्र स्वाईं के शिष्यों द्वारा समूह ओडिशी गायन हुआ।डॉ. हिमांशु शेखर स्वाईं द्वारा एकल शास्त्रीय गायन हुआ।गुरु जगन्नाथ कुआँर, जयगुरु प्रधान, जालंधर नायक एवं सहयोगी कलाकारों द्वारा मर्दला वादन की प्रस्तुति दी गई।पहले दिन के कार्यक्रम का संचालन डॉ. मृत्युंजय रथ एवं सुश्री अनन्या मिश्रा ने कियाजबकि डॉ. जगन्नाथ कुआँर ने धन्यवाद ज्ञापन किया।आयोजन के अंतिम दिन,11 जुलाई को समापन समारोह के मुख्य अतिथि के रुप में खंडपाड़ा के विधायक एवं नयागढ़ योजना समिति के अध्यक्ष दुष्यंत कुमार स्वईं ने सम्मानित अतिथि के रुप में नादब्रह्म को ओडिशा का गौरव बताते हुए कहा कि यह संस्था ओडिशी संगीत, गीत गोविंद तथा मर्दल परंपरा के संरक्षण एवं संवर्धन में उल्लेखनीय योगदान दे रही है।सम्मानित अतिथि एवं पूर्व सांसद अर्चना नायक ने कहा कि भारतीय शास्त्रीय संगीत के क्षेत्र में नादब्रह्म ने अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है।वरिष्ठ पत्रकार प्रदोष पटनायक ने कहा कि यदि संस्था को सरकार और विभिन्न संस्थानों का अधिक सहयोग मिले तो वह और भी बड़े सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन कर सकेगी। प्रख्यात कलाकार मीनती भंज तथा प्रोफेसर डॉ. कुआँर की प्रस्तुतियों को दर्शकों ने खूब सराहा। रत्नमंजरी दास ने कहा कि संस्था का मूल उद्देश्य पारंपरिक एवं शास्त्रीय संगीत का संरक्षण और प्रचार-प्रसार है। उपाध्यक्ष निमाकांत राउतराय ने आशा व्यक्त की कि अधिक प्रोत्साहन मिलने पर संस्था अपनी गतिविधियों का और अधिक विस्तार करेगी।समापन के अंतिम दिन गुरु पुष्परंजन मंगराज को ‘नादब्रह्म सम्मान’ तथा डॉ. प्रीतिपद्मा पांडा को ‘गुरु जगन्नाथ कुमार नादब्रह्म साहित्य सम्मान’ से सम्मानित किया गया।आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में—गुरु मुरलीधर स्वैन ने मर्दल वादन प्रस्तुत किया।सुप्रसिद्ध कलाकारों मीनती भंज, गुरु सुकांत कुंडू, कृष्णचंद्र सेठी, गुरु निमाकांत राउतराय तथा अवंतिका पटनायक ने शास्त्रीय गायन प्रस्तुत किया।गुरु पुष्पराज मंगराज के निर्देशन में उनके शिष्यों ने मनमोहक समूह ओडिसी नृत्य प्रस्तुत किया।अंतिम दिवस के कार्यक्रम का संचालन सुश्री अनन्या मिश्रा ने किया, जबकि वरिष्ठ सदस्य मीनती भंज ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।

अशोक पाण्डेय

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