“जीवन में विद्या अर्जन का वास्तविक महत्त्व क्या है?”-अनुचिंतन: अशोक पाण्डेय द्वारा.
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वैसे तो भगवान नारायण जी ने नर-नारी दोनों को एक समान बनाया है। लेकिन इनकी व्यक्तिगत प्रतिभा में अंतर सिर्फ विद्या अर्जन ही बताता है। विद्या , सत्य और आलोचना का साक्षात्कार कराना भी सिखाती है।
इसीलिए मान्यवर आप अपने जीवन में सत्य और आलोचना दोनों का वास्तविक साक्षात्कार करके ही क्षमता विकसित करें!
-अशोक पाण्डेय
भगवान पुरुषोत्तम की जय हो!











