“मिले जब राम सीता से टहलते समय फुलवारी में,सीता को राम प्यारे लगे,राम को लगी सीता प्यारी।”-यही नहीं, कलियां भी खिल गईं। -अर्थात् प्रकृति भी उस निश्छल प्रेम से प्रसन्न हो गई। ऐसा भी श्रीरामचरितमानस में यह वर्णन मिलता है कि ऋतुराज वसंत हमेशा राजा जनक की उस फुलवारी में निवास करते हैं।
मान्यवर, दीवाली आ रही है, श्रीराममय भारतवर्ष की दीवाली जिसमें आप भी दिल खोलकर दीवाली मनाएं लेकिन पूरी शुद्धता, स्वच्छता और पवित्रता के साथ लेकिन यह भी याद रखें कि वायु प्रदूषण कदापि न हो!
जय श्रीराम!
-अशोक पाण्डेय









