“विकसित भारत के निर्माण से पूर्व आज हमें अपनी चेतना, सामर्थ्य और कर्तव्य को बढ़ाकर सबसे पहले एक ऐसे प्रेममय व मंगलमय परिवार की स्थापना करनी चाहिए जहां पर मां,बहन, भाई, पत्नी और अपने बाल बच्चे खुशहाल होंगे ।”
-कल शाम सायं काल स्थानीय तेरापंथ भवन में 1969 से संघ प्रचारक श्री नंदलाल जी का सुमंगल परिवार गीत” सुन रहा था। कार्यक्रम लगभग डेढ़ घंटे चला।
सच कहता हूं कि उनके गीत की एक -एक पंक्ति खुशहाल परिवार के लिए सबसे बड़ी संदेश सिद्ध हुई। मान्यवर, विकसित भारत का शुभारंभ सबसे पहले आप से शुरू होता है। अगर आप खुश हैं ,अगर आपका परिवार खुशहाल है तो निश्चित रूप से आनेवाले समय में हमारा राममय भारत अवश्य विकसित हो जाएगा।
-अशोक पाण्डेय
“विकसित भारत के निर्माण से पूर्व आज हमें अपनी चेतना, सामर्थ्य और कर्तव्य को बढ़ाकर सबसे पहले एक ऐसे प्रेममय व मंगलमय परिवार की स्थापना करनी चाहिए जहां पर मां,बहन, भाई, पत्नी और अपने बाल बच्चे खुशहाल होंगे ।”











