श्रीमद् भागवत महापुराण के अनुसार: किसी भी सृष्टि के आरंभ के साथ साथ ही उसके विकास और अंतिम परिणति के बीज भी अंकुरित हो जाते हैं। ऐसे में, आप जैसे एक सतत कर्मशील व्यक्ति को अपने जीवन में हमेशा अपने धैर्य,धर्म और सत्यनिष्ठा को बनाए रखने की आवश्यकता है।
आप अपनी
नि: स्वार्थ जिम्मेदारियां बखूबी निभाते हैं।
जय जय जगन्नाथ!
-अशोक पाण्डेय
श्रीमद् भागवत महापुराण के अनुसार: किसी भी सृष्टि के आरंभ के साथ साथ ही उसके विकास और अंतिम परिणति के बीज भी अंकुरित हो जाते हैं।










