श्रीरामचरितमानस कहता है:
“बरु भल बास नरक कर ताता।
दुष्ट संग जनि देह बिधाता।।”-अर्थात् आप हमें नरक निवास भले दें लेकिन मुझे कभी भी दुष्टों की संगति न दें!
गरुण पुराण ने भी इसकी स्पष्ट पुष्टि की है। गरुण पुराण में कुल 39 हजार श्लोक हैं।उसके अनुसार भी नरक में निवास करने से पाप का क्षय होता है और दुष्टों की संगति करने से पाप की वृद्धि होती है।
जय हो जगदीश्वर की!
-अशोक पाण्डेय
श्रीरामचरितमानस कहता है:









