कठोपनिषद् के अनुसार गुरु- शिष्य को साथ- साथ रहना चाहिए।साथ- साथ भोजन करना चाहिए तथा साथ साथ ही सौहार्दपूर्ण वातावरण में सभी प्रकार की जीवनोपयोगी शिक्षाएं आनंदमय तरीके से ग्रहण करनी चाहिए। कठोपनिषद् यह भी कहता है कि जिसका मन रूपी लगाम जितना मजबूत ही मजबूत होता है वह व्यक्ति अपने जीवन में उतना ही अधिक कामयाबी के शीर्ष पर पहुंचता है।
मान्यवर,इसलिए हो सके तो आप भी अपने मन को सकारात्मक रखकर उसको हमेशा अपने आत्मविश्वास के नियंत्रण में रखें!
जय हो बिहार, बक्सर,ब्रह्मपुर वाले ब्रह्मेश्वर बाबा की!
पवनसुत हनुमान की!
-अशोक पाण्डेय
कठोपनिषद् के अनुसार गुरु- शिष्य को साथ- साथ रहना चाहिए।










