ऐतरिय उपनिषद के अनुसार:
हमारा मानव- शरीर ही हिन्दू देवालय है।
अग्नि देव हमारी वाणी में निवास करते हैं। वायुदेव हमारे मुख में हैं।हमारे शरीर में सूर्य, चन्द्र,पंचदेव और सप्त ऋषियों का भी वास है। इसलिए
मान्यवर, आप अपने मन,वचन, व्यवहार और कर्म को हमेशा पवित्र रखें!
जय हनुमान जी!!
-अशोक पाण्डेय











