-अशोक पाण्डेय
भारतीय शिक्षा व्यवस्था गुरुकुल से आरंभ होकर आज एआई(कृत्रिम बुद्धिमता)तक पहुंच चुकी है।आज भारतीय शिक्षा-व्यवस्था में युवाओं की सक्रिय भागीदारी स्पष्ट नजर आ रही है।वर्तमान शैक्षिक परिवेश में दिन प्रतिदिन क्रांतिकारी परिवर्तन देखने को मिल रहा है।आज की युवा पीढ़ी सर्वांगीण विकास के नित्य नये-नये शिखरों को छू रही है।फिर भी,जिस भारतीय सनातनी संस्कार और संस्कृति को बचाने में कोई एक शिक्षाविद् सफल रहा है तो वह हैं ओड़िशा प्रदेश की राजधानी भुवनेश्वर स्थित कीट-कीस और कीम्स के प्राणप्रतिष्ठाता, महान् शिक्षाविद्, भारतीय संसद के राज्यसभा तथा ओड़िशा कंधमाल लोकसभा के पूर्व सांसद प्रोफेसर अच्युत सामंत।वे मन,वचन और कर्म से त्यागी,तपस्वी और संयमी शिक्षाविद् हैं। वे सदाचारी,सत्यनिष्ठ तथा आत्मविश्वासी हैं। वे स्व अनुशासित तथा ईमानदार हैं। वे परमार्थ चेतना के जीवंत प्रमाण हैं।उनका जीवन-दर्शन ऑर्ट ऑफ गिविंग एक सफल सामाजिक आंदोलन बनकर अन्तर्राष्ट्रीय आकार लेकर विश्व के लगभग 200 देशों में स्वेच्छापूर्वक प्रतिवर्ष 17 मई को आयोजित हो रहा है।सच कहा जाय तो प्रोफेसर अच्युत सामंत की अपनी व्यक्तिगत शैक्षिक पहल कीट-कीस-कीम्स की उत्कृष्ट तथा जीवनोपयोगी शैक्षिक पहल के माध्यम से आज महिला सशक्तिकरण,आदिवासी महिला शक्तिकरण,आदिवासी युवा सशक्तिकरण तथा विभिन्न बाल-प्रतिभा सशक्तिकरण योजनाएं सभी प्रकार से यथार्य़ सह आदर्श हैं सफल सिद्ध हो रही हैं।उनकी शैक्षिक पहल वर्षः 1992-93 से लेकर आज वर्षः2026 के जुलाई तक का अगर ईमानदारी से अवलोकन और मूल्यांकन किया जाय तो भारतवर्ष के गुरुकुल की शिक्षा-व्यवस्था से लेकर आज की एआई(कृत्रिम बुद्धिमता) की शिक्षा तक में पूरी तरह से सफल बनानेवाले एकमात्र शिक्षाविद् महान शिक्षाविद् प्रोफेसर अच्युत सामंत ही हैं। उनका विश्व का सबसे बड़ा तथा प्रथम आदिवासी आवासीय डीम्ड विश्वविद्यालय कीस ही है जो भारतवर्ष का वास्तविक तीर्थस्थल तथा वास्तविक शांतिनिकेतन है। प्रोफेसर सामंत का कीस मानवतावादी अन्तर्राष्ट्रीय पुरस्कार योजना,कीट नन्हीं परी राष्ट्रीय खिताब योजना आदि पूरी तरह से प्रेरणादायी एवं शतप्रतिशत सफल योजनाएं है। खेलों की दुनिया को प्रोफेसर अच्युत सामंत ने वह ऊंचाई प्रदान कर दी है जहां तक पहुंचने की बात तो किसी के लिए संभव नहीं ही है सोचना की बात भी किसी व्यक्ति विशेष के लिए पूर्णतः असंभव प्रतीत होता है।कीट से उन्होंने अनेक ओलंपियन बनाकर तथा अन्तर्राष्ट्रीय वालीबाल फेडरेशन के स्वयं संरक्षक बनकर उन्होंने फीफा से वालीबाल को स्कूली स्तर से पहली बार मान्यता दिलाकर वालीबाल को गांव-गांव तक लोकप्रिय बना दिया है।क्रिकेट से लेकर एथलेटिक तक,लान टेनिस से लेकर शतरंज तक तथा खेलो इण्डिया से लेकर एशियन गेम्स तक,राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय महिला-पुरुष हाकी तक अगर उनकी संस्थाओं कीट-कीस की असाधारण उपलब्धियों की समीक्षा की जाय तो यह निश्चित रूप से मानना पड़ेगा कि प्रोफेसर अच्युत सामंत के विदेह और निःस्वार्थ शैक्षिक पहल भारतवर्ष ही नहीं अपितु दुनिया के लिए वास्तविक रूप में गौरवमयी तथा प्रेरणामयी वास्तविकता है।हाल ही में, 2026 के सिजनः16 की इंडियन आइडल विजेता बनी हैं कीट की ही पूर्व छात्रा ज्योतिर्मयी नायक।
प्रोफेसर अच्युत सामंत कहते हैं कि शिक्षा बालक-युवाओं का तीसरा नेत्र है जिसको वे अपनी शेक्षिक पहल कीट-कीस-कीम्स के माध्यम से भारतवर्ष की गुरुकुल शिक्षा व्यवस्था से लेकर आज की एआई शिक्षा व्यवस्था तक पूर्णरुपेण साकार कर रहे हैं।
-अशोक पाण्डेय
शिक्षा को जीवनोपयोगी बनानेवालेः महान् शिक्षाविद् प्रोफेसर अच्युत सामंत










