भुवनेश्वर:—
देखा जाए तो संसार में सभी व्यक्ति मां के भक्त होते हैं मां के द्वारा ही जीवन का पालन पोषण होता है 9 महीने गर्भ में मां ही धारण करती है। पिता नहीं बच्चे की गंदगी उठाते हैं मां ही उठाती है। पिता साफ-सुथरे बच्चे को गोद में लेता है और जरा भी गंदा हो जाए तो मां को वापस पकड़ा देता है। आप भी अंबा भगवती का स्मरण करें। जब तक शक्ति की उपासना नहीं की जाएगी तब तक हमारा देश शक्तिशाली बन नहीं सकता। राष्ट्र की उन्नति तभी होगी जब हम व्यक्ति शक्ति की उपासना करने लगेंगे शक्ति से ही सारा संसार संचालित होता है। अर्जुन ने भगवान से कहने पर भगवती परांबा दुर्गा की आराधना की तब सिंह पर सवार अष्टभुजा भगवती दुर्गा आकाश में प्रगट हो गई। देवताओं ने पुष्प बरसाए और बाजे बजाए भगवती दुर्गा ने पूछा तुमने मेरी स्तुति किसने की ठाकुर जी के आदेशानुसार मैंने अपने आप स्तुति की मां क्योंकि आप शक्ति स्वरूपा है। आवश्यक युद्ध में शक्ति की भी जरूरत पड़ती है शक्ति के बिना कुछ नहीं हो सकता इसलिए हे मां आप मुझ पर कृपा करें। क्योंकि आप शक्तिपुंज है मां भगवती ने कहा युद्ध के समय तुम ने मेरा नाम लिए है। इसलिए तुम्हारी भुजाओं में मेरी शक्ति होगी। वह शक्ति ही दुष्टों का संहार करेगी तथा देश को धार्मिक बनाएगी। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम ने भी नवरात्रि व्रत करके भगवती मां को प्रकट किया था । रावण वध के लिए मां दुर्गा की शक्ति प्राप्त करते हुए आगे बढ़े थे । यदि आप संपूर्ण देवी भागवत का सेवन करते हैं तब आपको शक्ति तत्व का बोध हो जाएगा। स्वयं का देवताओं द्वारा ही सूर्य प्रकाश देने की शक्ति है। अग्नि में दहन की सकती है। वायु मे गति की सकती है और आज भक्ति में मेरी शक्ति है खेलने में भी शक्ति चाहिए, बोलने में भी शक्ति चाहिए और कार्यक्रम में भी शक्ति चाहिए जितने कलकारखाने चल रहे हैं सब विद्युत शक्ति से चलते ।इस प्रकार विद्युत भी सकती है ।या कहीं जो विचार करने योग्य है कि जब कोई व्यक्ति कमजोर बीमार या बहुत बुढा़ हो जाए तब उसने उसे कहा जाए कि दोनों हाथों से सामान लेकर दौड़ लगाओ तब वह कहेगा उठाने की शक्ति नहीं है । इसका मतलब है कि ब्रह्मा विष्णु सब आप के साथ हो लेकिन शक्ति आपके साथ ना हो तब आप कुछ नहीं कर सकते सारा का सारा कार्य शक्ति से ही होता है। देवी भागवत सुनने का फल मां शक्ति है और शक्ति से ही सारा संसार संचालित होता है ।वेदव्यास जी ने श्रीमद् देवी भागवत को अपने पास छुपा कर रखा था। जब जन्मेजय ज्यादा परेशान हुए की पिता की सद्गति कैसे हो तब वेदव्यास जी ने कहा जन्मेजय मैं आपको देवी भागवत की कथा सुनाता हूं। यह नौ दिन में पूरी होती है। जो देवी भागवत की कथा सुनते हैं उनके अंदर मां का प्रवेश होता है ।देवी भागवत सुनने वाला कभी नर्क नहीं जा सकता। देवी भागवत में लिखा है कि देवकी और वासुदेव को भगवान कृष्ण देवी की उपासना से मिले थे। जो माताएं चरित्रवान होती है पवित्र होती है मां भगवती सिंह वाहिनी उनके अंदर पवन के रूप में प्रवेश करती है । मां जितने जल्द देवियों पर पसंद होती हैं अति शीघ्र पुरुषों पर नहीं होती। मां बेटियों की ओर ज्यादा ध्यान देती हैं पिता पुत्र से ज्यादा प्यार करती है मां । यदि आप मां के चरणों का थोड़ा भी ध्यान करो तब मां की अमृत वर्षा आप पर हो जाएगी मां की शक्ति आपके अंदर प्रवेश कर जाएगी और आपका जीवन धन्य धन्य हो जायेगा। त्रिपुर सुंदरी तंत्र में लिखा है कि दुर्गा त्रिपुर सुंदरी ही कृष्ण बनकर बांसुरी बजाती है और सारे संसार को मोहित कर लेती हैं । कालिका पुराण में लिखा है भगवान शंकर राधा बनते हैं और काली कृष्ण बनती हैं। एक बार शंकर और पार्वती में विनोद चल रहा था। पार्वती अंबा कहती हैं कि पुरुषों को स्त्रियों के दिल का पता नहीं होता है जिससे प्यार करती हैं पूरे दिल से करती है और पुरुष भ्रमण होते हैं वह नारी के हृदय को समझ नहीं पाते भगवान शंकर ने कहा कि पुरुष नारी को पसंद करने के लिए सारी जिंदगी लगा देता है नारी को क्या पता है कि पुरुष के हृदय में नारी के लिए कितना प्यार है अंबा पार्वती ने कहा भोलेनाथ आपको नारी के हृदय का पता नहीं लग सकता भगवान शंकर ने कहा आपको पुरुष के दिल का पता नहीं लग सकता उन्होंने एक-दूसरे के हृदय का पता लगाने के लिए योजना बनाएं। भगवान शंकर गौर वर्ण है बोले गोरी राधा बन जाता हूं ।तुम काली हो इसलिए तुम काले कृष्ण बन जाओ ।हमारे लिए तरसना और हम तुम्हारे लिए तरसेंगे और दोनों ही समझ में आ जाएगा कि एक दूसरे का दिल कैसा होता है। इसलिए भगवान शंकर भगवती काली राधा कृष्ण बनकर प्रकट हुए बांसुरी बजाई ,दिव्य लीला की जिसमें आज भक्त लोग रम रहे हैं और जीवो का उद्धार होता हैं। ईश्वर के विभिन्न रूपों में कहीं भेद नहीं है भेदभाव दूसरों ने पैदा कर लिया है। तुलसीदास जी राम के भक्त हैं लेकिन गणपति की स्तुति करते हैं सरस्वती की वंदना करते हैं भगवती दुर्गा की स्तुति करते हैं । जय जय जय गिरिराज किशोरी जय महेश मुख चंद्र चकोरी । जय गजबदन सदानंद माता जगत जननी दामिनी दुति गाता ।। असंभव को संभव बनाएं मां नारद जी की प्रेरणा से भगवती की आराधना वेदव्यास जी ने की भगवान शंकर भगवती मां गणपति जी यह सब देने ही वाले हैं देते रहना इनका स्वभाव है । जब तक जिज्ञासा नहीं हो तब तक तत्व की प्राप्ति नहीं हो सकती भूख ना हो और 10 प्रकार की चीजें लाकर कोई सामने रख दे सब व्यर्थ हैं ।भूख लगने पर भोजन में मिठास का अनुभव होता है। प्यास लगने पर पानी में मिठास का अनुभव होता है।इसी प्रकार तत्व को जानने की जिज्ञासा जागे तब परम तत्व का बोध होता है ।और सरवन करने में आनंद भी आता है। ब्रह्म और माया के सहयोग से निर्मित जगत परमात्मा को वेदों ने निराकार निर्विकार बता रहा है। परमात्मा में विकास नहीं है और सृष्टि बिना विकास के बन नहीं सकती जब किसी वस्तु का निर्माण करना होता है तब उसमें कोई भी काम आता ही है सोना पिछलेगा तभी उसके आभूषण बनेंगे। यदि मान लिया जाए कि परमात्मा ही संसार बनाई है। परमात्मा में विकार आ जाए और वेद कहते हैं कि परमात्मा बेकार है उसमें विकास नहीं इसका सूक्ष्म विवेचन यह है कि परमात्मा के सानिध्य में प्रकृति की ही संसार का निर्माण करती है। परमात्मा ज्यों के त्यों रहते हैं और प्रकृति अपना कार्य करने लगती जैसे चुंबक लोहे से बना है चुंबक ने विकास और निष्क्रिय जाता है और लोहे को सक्रिय बना देता है। चुंबक स्वयं निष्क्रिय जाकर लोहे में सक्रियता पैदा कर देता है। इसी प्रकार परमात्मा स्वयं निराकार रहते हुए अपनी अनिर्वचनीय मान के द्वारा संसार का निर्माण करते हैं और अविद्या अंश व पंचमहाभूतओं का निर्माण कर के सारी सृष्टि बनता है। जैसे गुलाब के पौधे में एक चुभने वाला कांटा भी पैदा होता है और दूसरा सुगंधित पुष्प भी पैदा होता है दोनों एक ही पेड़ से पैदा हुए हैं। लेकिन एक काटा है जो चुभ रहा है और दूसरा पुष्प है जो सुगंधित दे रहा है एक ही मिट्टी पृथ्वी से लोहा पैदा हुआ और वही से कांच पैदा होगा लोहे की पट्टी आंख पर लगाओ तब जो दिख रहा है वह भी नहीं दिखेगा और पृथ्वी का भी विकास का चश्मे में लगा दिया जाए तब ना दिखने वाला भी दिखने लगता है एक ही पृथ्वी के दो विकास हुए एक आंख की ज्योति को रोकता है दूसरा बढ़ा देता है। इसी प्रकार विद्या माया ईश्वर की ओर से जीव को मोड़ देती है।








