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“हिन्दी बोलने -पढ़ने के साथ-साथ लिखने का भी अवश्य अभ्यास करें!”

-अशोक पाण्डेय ——————— भारत की सबसे सरल और सशक्त जन सम्पर्क की भाषा हिन्दी ही है। लेकिन आज जिस तरह
“ओम् और शांति ” विचार- विश्लेषण:

“ओम् और शांति ” विचार- विश्लेषण:

-अशोक पाण्डेय ———————- ओम् बीज मंत्र है जबकि शांति जीवन का आधार है। ओम् परमपिता परमेश्वर का आह्वान है। ओम्
आईआईटी भुवनेश्वर ने ऊर्जा, पर्यावरण और स्थिरता में उन्नत सामग्री पर  अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया

आईआईटी भुवनेश्वर ने ऊर्जा, पर्यावरण और स्थिरता में उन्नत सामग्री पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया

भुवनेश्वर, 19 मई 2025: 16 से 18 मई 2025 के दौरान मैटेरियल्स रिसर्च सोसाइटी ऑफ इंडिया (MRSI) के सहयोग से

“मन को नियंत्रित करें‌ और दिल जो कहे वही काम करें!”

-अशोक पाण्डेय ——————— अपने चंचल मन को मौन साधना के माध्यम से नियंत्रित करें और अपने दिल की करुण भावना

महाभारत एक धर्म युद्ध था जिसमें पाण्डव पक्ष की ओर से निम्न शंख बजाए गए

महाभारत एक धर्म युद्ध था जिसमें पाण्डव पक्ष की ओर से निम्न शंख बजाए गए : पांचजन्य, देवदत्त,पौण्ड्र, अनंतविजय,सुघोष और
जगन्नाथ जी के हैं भारत के चारों धाम :

जगन्नाथ जी के हैं भारत के चारों धाम :

-अशोक पाण्डेय ——————– जब तपस्वियों ने‌ घेरा तो बदरीनाथ कहलाए। जब कपियों ने घेरा तो‌ रामनाथ, रामेश्वरम कहलाए। जब गोपियों
परशुरामजी : राष्ट्र और समाज निर्माण का अवतार

परशुरामजी : राष्ट्र और समाज निर्माण का अवतार

अक्षय तृतीया पर विशेष झूठा है क्षत्रिय विनाश का प्रसंग सृष्टि निर्माण में अवतारों के क्रम में परशुराम जी का
चतुर्धा दारु विग्रह देवगण कलियुग के चारों जीवित वेद हैं जो श्री जगन्नाथ धाम पुरी के श्रीमंदिर के रत्न वेदी पर विराजमान हैं ।

चतुर्धा दारु विग्रह देवगण कलियुग के चारों जीवित वेद हैं जो श्री जगन्नाथ धाम पुरी के श्रीमंदिर के रत्न वेदी पर विराजमान हैं ।

चतुर्धा दारु विग्रह देवगण कलियुग के चारों जीवित वेद हैं जो श्री जगन्नाथ धाम पुरी के श्रीमंदिर के रत्न वेदी

“आलसी न बनें!”

-अशोक पाण्डेय ——————— एक प्रजापालक और न्यायप्रिय राजा था। वह अपना राजकोष अपनी प्रजा के लिए खर्च करता था। अपने
“ज्ञान बांटने के लिए ही होता है।ज्ञान का दान तो ब्रह्मा जी देवता,मानव और दानव को एक साथ ही दिया था लेकिन…”

“ज्ञान बांटने के लिए ही होता है।ज्ञान का दान तो ब्रह्मा जी देवता,मानव और दानव को एक साथ ही दिया था लेकिन…”

-अशोक पाण्डेय ———————– एक समय की बात है। ब्रह्मा जी के पास देवता,मानव और दानव एकसाथ ज्ञान मांगने के लिए

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