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” आजकल डाक्टरों की अंगुलियों रोगियों की नब्ज टटोलने से पहले उनकी जेबें टटोलती हैं।”

-विश्लेषक :अशोक पाण्डेय ——————— “मेरी राम कहानी में” शिवपूजन सहाय लिखते हैं कि आजकल डाक्टरों की अंगुलियां रोगियों की नब्ज

“अपने माता-पिता को‌ ही अपने सफल जीवन का भगवान जगन्नाथ मानें!”

-अशोक पाण्डेय ——————— सबसे व्यावहारिक बात, विचार और संदेश यह है कि हमसभी अपने -अपने माता-पिता को ही अपने सफल
भगवान परशुराम की जन्मस्थली जानापांव से तपोस्थली महेन्द्रगिरि पर्वत तकःएक विश्लेषणः

भगवान परशुराम की जन्मस्थली जानापांव से तपोस्थली महेन्द्रगिरि पर्वत तकःएक विश्लेषणः

अशोक पाण्डेय, राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त विश्व का एकमात्र देश भारत ही है जहां पर ब्राह्मण,गाय,देवता तथा सज्जनों की रक्षा के

भाषण देते समय सबसे पहले ‘आप’ का ही प्रयोग करें! ‘मैं’ का प्रयोग बहुत कम करें!

-अशोक पाण्डेय —————— ‘गीता’ में वक्ता हैं शांतिदूत श्रीकृष्ण और श्रोता हैं अर्जुन। दोनों के वार्तालाप को अगर ध्यान से

एक परिवार को आनंदमय तरीके से चलाने के लिए पांच शीलों

एक परिवार को आनंदमय तरीके से चलाने के लिए पांच शीलों : संस्कार, सहकारिता,आपसी सहमति, प्रगतिशीलता और एक -दूसरे पर

आज देश को कर्मवीरों की जरूरत है

“आज देश को कर्मवीरों की जरूरत है,आलोचकों की नहीं।आज देश को शक्ति बोध और सौंदर्य बोध वालों की जरूरत है।

कल किसने देखा है?

-अशोक पाण्डेय ——————– कल किसी ने भी नहीं देखा है।राजा-रंक सभी को आज और अभी में ही जीना होता है।

“माया का मोहक कानन:यह सृष्टि”

-अशोक पाण्डेय ———————– यह सृष्टि माया का मोहक नंदन कानन है।यह एक ऐसा खुबसूरत जंगल है जहां पर रज,तम और

“प्रत्येक व्यक्ति किसी न किसी क्षेत्र में अव्वल अवश्य होता है।”

-अशोक पाण्डेय ———————- जगत के नाथ की लीला अपरम्पार है।”गज़ब रचा खिलौना माटी का!” राजा-रंक, पण्डित- पुजारी, ज्ञानी -अज्ञानी,साधु -चोर,व्यापारी

“अपने आप ही महापण्डित और महाज्ञानी न बनें!”

-अशोक पाण्डेय ——————— ‘ज्ञान’ तो मां सरस्वती का वरदान है जिसको सबसे पहले ग्रहण किया था आदिकवि वाल्मीकि ने। सद्गुरूओं

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