-अनुचिंतन: अशोक पाण्डेय
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‘चतुर’शब्द सामान्यतः चालाक, बुद्धिमान,विवेकी व्यक्ति के लिए किया जाता है लेकिन हमारे सभी सनातनी श्रुतियां,वेद, पुराण, उपनिषद, गीता, रामायण, श्रीमद् भागवत कथा और जगन्नाथ संस्कृति आदि चतुर उसको मानते हैं जो मानवीय मूल्यों की रक्षा के लिए, मानवता की रक्षा के लिए अपने अर्जित धन-वैभव का प्रयोग करता है।जो मानव सेवा को ही माधव सेवा मानता है।
मान्यवर,आप आज के संक्रमण काल में और विशेषकर पुरुषोत्तम मास में चतुर शिरोमणि बनने का प्रयास करें!
“चतुर शिरोमणि कौन है?”











