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जय जगन्नाथ!

जय जगन्नाथ!
मैंने बड़े बड़े जगतगुरु शंकराचार्य देखे। धर्म गुरु देखे। धर्माचार्य देखे। लेकिन सभी का कोई न कोई स्वार्थ असीम देखा। जैसे: मान-मर्यादा का, भौतिक सुख का ,हम बड़े तो हम का। किसी ने नारायण की अटूट भक्ति की शक्ति की ओर ध्यान नहीं दिया।किसी ने अपने आप पर पूरे आत्मविश्वास से भरोसा नहीं किया।
यह संक्रमण काल पूरी तरह से प्रलयंकारी है। इससे सिर्फ और सिर्फ आपकी पुरुषोत्तम की भक्ति की शक्ति ही बचा सकती है।
-अशोक पाण्डेय

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