जय श्रीराम!
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मान्यवर,जो व्यक्ति अपने जीवन का दर्शन “देने की कला” को अपना लेता है, वह व्यक्ति दुनिया का एक महान् और श्रेष्ठ व्यक्ति स्वत: बन जाता है। ऐसे में,उसके देने की कला एक उपयोगी सामाजिक आंदोलन बनकर उसके घर- परिवार ,समाज,
राष्ट्र और साथ ही साथ पूरी दुनिया को आपसी प्रेम, दोस्ती, सद्भाव, भाईचारा,आनंद, खुशी और आत्मीयता प्रदान करता है उससे दुनिया में चारों तरफ अमन- चैन फैलता है।
इसलिए 2026 की श्रीराममय दीवाली आप इसी संकल्पित भाव से प्रदूषणमुक्त रखकर,मन,वचन और कर्म से स्वच्छ,पवित्र तथा आध्यात्मिक तरीके से ही मनाएं!
-अशोक पाण्डेय
जय श्रीराम!











