जिस प्रकार अयोध्या भूमि “त्यागभूमि” है ठीक उसी प्रकार “श्री जगन्नाथभूमि” भी त्यागभूमि है। वहां के विश्व प्रसिद्ध श्रीमंदिर में जगन्नाथ जी के दर्शन से पूर्व भक्तों को अपने भक्तिबल,सेवाबल ,धनबल,जनबल तथा मान -सम्मान बल का त्याग करना पड़ता है और तभी जाकर भगवान पुरुषोत्तम और चतुर्धा देवविग्रहों के दर्शन होते हैं।
यही नहीं,
श्री जगन्नाथभूमि पर प्रतिदिन सनातनी अंत्येष्टि होती है, भवबंधन से मुक्ति मिलती है,मोक्ष मिलता है। इस देवभूमि पर प्रतिदिन जीवनोपयोगी सनातनी प्रवचन होते हैं। इसप्रकार इस धर्मकानन में प्रतिक्षण सभी को शांति, मैत्री और सद्भाव मिलता है।
जय जगन्नाथ!
जय मां कालरात्रि!
-अशोक पाण्डेय
जिस प्रकार अयोध्या भूमि “त्यागभूमि” है ठीक उसी प्रकार “श्री जगन्नाथभूमि” भी त्यागभूमि है।











