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पद्मविभूषण से अलंकृत दीदी मां साध्वी ऋतंभरा ने किया कीट-कीस और कीम्स  का दौरा सारे तीर्थ बार-बार,कीस तीर्थ एक बार तथा दीदी मां स्वागतम्,स्वागतम् से गुंजायमान हुआ चालीस हजार आदिवासी आवासीय विद्यालय के बच्चों का कीस प्रांगण

पद्मविभूषण से अलंकृत दीदी मां साध्वी ऋतंभरा ने किया कीट-कीस और कीम्स  का दौरा

सारे तीर्थ बार-बार,कीस तीर्थ एक बार

तथा

दीदी मां स्वागतम्,स्वागतम् से गुंजायमान हुआ

चालीस हजार आदिवासी आवासीय विद्यालय के

बच्चों का कीस प्रांगण

दीदी मां साध्वी ऋतंभरा ने कीट-कीस और कीम्स के संस्थापक प्रोफेसर डॉ.अच्युत सामंत को एक तपस्वी,मेहनती और आदिवासी बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए समर्पित व्यक्तित्व बताया.

भुवनेश्वर, 8 सितंबर: प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु पद्मविभूषण से अलंकृत दीदी मां साध्वी ऋतंभरा जी ने मंगलवार को भुवनेश्वर कीट-कीस और कीम्स परिसरों का दौरा किया। उन्होंने तीनों  शैक्षिक संस्थानों को ‘अद्भुत’ बताते हुए कहा कि यहां कीस में उन्हें सभी तीर्थों की पवित्रता और सभी देवी-देवताओं की दिव्यता का अनुभव हुआ।उन्होंने कीस  की आदिवासी छात्राओं को आशीर्वाद देते हुए कहा कि वह लंबे समय से शिक्षा के क्षेत्र में कार्य कर रही हैं, लेकिन महान् शिक्षाविद् एवं निःस्वार्थी समाजसेवी प्रोफेसर डॉ. अच्युत सामंत द्वारा स्थापित कीस को पहली बार देखा जो देश की एक असाधारण संस्था है।

साध्वी ऋतंभरा ने कहा, “मैं यहां आकर इतनी प्रसन्न हूं कि इसे व्यक्त करने के लिए मेरे पास शब्द नहीं हैं। कीस सभी तीर्थों की पवित्रता और सभी देवी-देवताओं की दिव्यता को समेटे हुए है।”

उन्होंने कीट-कीस और कीम्स के संस्थापक महान् शिक्षाविद् प्रोफेसर डॉ. अच्युत सामंत के समर्पण की प्रशंसा करते हुए कहा कि कीस एक व्यक्ति की तपस्या, अथक परिश्रम और समर्पण का जीवंत उदाहरण है। उन्होंने कहा, “आज मैंने यहां देखा कि तपस्या, मेहनत और समर्पण का वास्तविक अर्थ क्या होता है।”

कीस की आदिवासी छात्राओं  के अनुशासन और संस्कारों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें लगा कि “यही पर वास्तविक भारत है।” उन्होंने आदिवासी छात्राओं से कहा कि उन्हें गर्व होना चाहिए कि वे प्रोफेसर डॉ. सामंत के मार्गदर्शन में यहां पर निःशुल्क केजी से पीजी तक शिक्षा प्राप्त कर रही हैं।

साध्वी ऋतंभरा ने यह भी कहा कि केवल दूसरों को सलाह देने के बजाय जरूरतमंदों की मदद के लिए हाथ बढ़ाना अधिक महत्त्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, “यहां बच्चों को केवल स्वाभिमानी बनना ही नहीं सिखाया जाता, बल्कि आत्मनिर्भर बनना भी सिखाया जाता है।व्यक्ति तभी स्वाभिमानी बन सकता है, जब वह आत्मनिर्भर हो।”

कार्यक्रम में प्रोफेसर डॉ. अच्युत सामंत ने स्वागत भाषण दिया।प्रख्यात शिक्षाविद् अशोक पाण्डेय ने अतिथियों का परिचय कराया और कीस के कुलपति प्रो. सरनजीत सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

-अशोक पाण्डेय

 

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