मान्यवर,
भगवान कैलासपतिजी अपने कैलासपति लोक में सानंद बैठकर सर्व प्रथम माता पार्वती जी को “श्रीरामचरित” की दिव्यतम कथा सुनाई थी। यह चर्चा गोस्वामी तुलसीदासजी ने अपनी अमर रचना श्रीरामचरितमानस में तथा श्री रामकथा के विश्व विख्यात कथा व्यास परमपूज्य मोरारी बापू जी ने अपने व्यासपीठ से
अपनी सुंदर व्याख्या के द्वारा स्पष्ट की है।उनके अनुसार
रामकथा का पहला क्रम है: भगवान श्रीरामजी का दिव्य प्राकट्य। दूसरा क्रम है: रामसेतु और तीसरा क्रम है: रामराज्य।
आज श्रीराममय भारतवर्ष को मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के “रामराज्य” की आवश्यकता है।
आज महा अष्टमी तिथि है। इसलिए मां दुर्गा से सबसे पहले आपसभी के आरोग्य व सानंदमय रहने के साथ साथ श्रीराभमय भारतवर्ष को विकसित बनाने की मैं प्रार्थना करता हूं-
-अशोक पाण्डेय
मान्यवर,











