“मिलन, श्रीराम -सीता का”
पहली बार श्रीराम -सीता का मिलन विदेह राजा जनक की पुष्पवाटिका में हुआ। उस मिलन का महत्त्व प्रकृति के सानिध्य में एक दिव्य संवेदनात्मक मिलन के रूप में अमर है। उस दिव्य मिलन में किसी प्रकार का निजी स्वार्थ नहीं था अपितु एक दिव्य प्रारब्ध था।
मान्यवर, आप भी किसी से मिलें तो बिना किसी निजी स्वार्थ के।आपकी किसी से किसी भी प्रकार की अपेक्षा नि: स्वार्थ होनी चाहिए।
जय श्रीराम!
-अशोक पाण्डेय
“मिलन, श्रीराम -सीता का”











