मैंने अपने व्यक्तिगत छात्र जीवन में कभी पढ़ा था और अपने केन्द्रीय विद्यालय के बच्चों को भी यह पढ़ाया था कि फूलों के सम्पर्क में आकर कभी -कभी छोटे -छोटे कीड़े (इनसेक्ट्स) भी देवताओं के मस्तक पर चढ़ जाते हैं। मान्यवर, आपका और मेरा साथ भी ठीक उसी प्रकार का है , ऐसा मैं व्यक्तिगत रूप से मानता हूं। अच्छे आप हैं और मैं आपके सम्पर्क में आकर अच्छा बन रहा हूं। इस साल की दीवाली पर मेरा आपके लिए एक ही संदेश है कि मान्यवर आप आजीवन एक सत्यनिष्ठ और सदाचारी सनातनी बनें!पंच देवों की विधिवत और नित्य पूजा करें!
विश्वास कीजिए, आपकी यशगाथा फूलों की सुगंध की तरह ही हमेशा और आजीवन फैलेगी!
-अशोक पाण्डेय











