“सारे तीर्थ बार-बार ‘कीस तीर्थ ‘ एक बार!”-
पद्म विभूषण दीदी मां साध्वी ऋतंभरा जी ने ‘कीस तीर्थ’ के प्रणेता तथा कीस के कुल लगभग चालीस हजार आदिवासी बच्चों और उसके शिक्षकों को जो संदेश बिते हुए कल दिया है, वह हम सभी के लिए भी सभी प्रकार से अनुकरणीय है।
जय जगन्नाथ!
-अशोक पाण्डेय











